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अल्मोड़ा जिले के प्रमुख स्थल | अल्मोड़ा जिला (Almora District ) | Hindlogy



अल्मोड़ा जिले के प्रमुख स्थल



अल्मोड़ा नगर

(8वीं और 9वीं शताब्दी ईसा पूर्व) काल से ही अल्मोड़ा क्षेत्र में मानव बस्तियों के होने के प्रमाण मिलते हैं।

प्राचीन ग्रंथों, जैसे विष्णु पुराण और स्कन्दपुराण आदि के अनुसार भी इस क्षेत्र में मानव बस्तियों के होने का विवरण है।
शक, किराट, खस ,नाग, और हुुण जातियां इस क्षेत्र की सबसे प्राचीन जनजातियां है।

कत्युरी राजवंश

कत्युरी राजवंश ने अल्मोड़ा क्षेत्र में अपने राज्य की स्थापना की, जिसका ज्ञान अल्मोड़ा सिक्को से प्राप्त होता हैं ।

अल्मोड़ा नगर के बनने से पहले अल्मोड़ा का क्षेत्र कत्युरी राजा बैचाल्देव के अधीन था

जिसे राजा ने श्री चंद तिवारी नामक एक गुजराती ब्राह्मण को दान किया।

अल्मोड़ा, कुमाऊँ राज्य पर शासन करने वाले चंदवंशीय राजाओं की राजधानी थी।

स्थानीय किदवंती के अनुसार, तिवारी जाति अल्मोड़ा के सबसे पहले निवासी माने गए है ,
तिवारी जाति कटारमल के सूर्य मंदिर में बर्तनों की सफाई के लिए अल्मोड़ा नामक अम्लीय घास की आपूर्ति करते थे, इसी घास के नाम पर जनपद का नाम अल्मोड़ा जनपद पड़ा ।

कुणिंद

कुणिंद यहां के प्रमुख वास्तविक स्थानीय शासक थे।
खस भी यहाँ की एक प्राचीन जाति थी, जो प्रारंभिक आर्यो से संबंधित थे|खसों ने ही इस क्षेत्र को खसदेश या खसमंडल का नाम दिया।
प्राचीन अल्मोड़ा कस्बा, अपनी स्थापना से पहले कत्यूरी राजा बैचल्देव के अधीन था।
उस राजा ने अपनी धरती का एक बड़ा भाग एक गुजराती ब्राह्मण श्री चांद तिवारी को दान दे दिया।

कत्यूरी

कत्यूरी राजाओं के समय में इसे राजपुर कहा जाता था। ‘राजपुर’ नाम का बहुत सी प्राचीन ताँबे की प्लेटों पर भी उल्लेख मिला है।अल्मोड़ा में चंदों के शासन से पहले नगर के दोनों छोरों पर दो किलों स्थित थे।
1- अल्मोड़ा नगर के दक्षिण भाग में खागमरा किला स्थित था, जिसमें बैचल्देव उर्फ बैजलदेव (कत्यूरी राजा ) का निवास था। खगमारा किला को नवीं शताब्दी में कत्यूरी राजाओ के द्वारा ही बनवाया गया था।
2- अल्मोड़ा नगर के उत्तर-पश्चिम में रेयलाकोट का किला था, यह किला रेयला समुदाय के एक राजा का महल था। महल में स्फटिक के खंभे भी लगे थे।

अल्मोड़ा नगर एवं चंद वंश

चंदों की पूर्व राजधानी चंपावत थी ,जहां बार-बार गोरखा आक्रमण होने का भय था |
चंद राजा भीष्म चंद ने राजधानी चंपावत से खगमरा कोर्ट स्थानांतरित करने की घोषणा की, परंतु राजधानी खगमरा स्थापित की जाती उससे पहले ही रायगढ़ के एक खसिया सरदार गजुवा ने धोखे से भीष्म चंद्र की हत्या कर खगमरा पर अधिकार कर लिया |

अल्मोड़ा नगर की स्थापना

भीष्म चंद्र का दत्तक पुत्र बालों कल्याण चंद डोटी में हुए विद्रोह के दमन में व्यस्त था
पिता की मृत्यु का समाचार पाते ही तुरंत लौट आया और विद्रोही सरदार को पराजित कर खगमरा कोर्ट की पहाड़ी में 1563 में एक नगर की स्थापना की तथा पल्टन बाजार में लाल मंडी किला बनवाया |
यह नगर अल्मोड़ा नगर कहलाया इसी अल्मोड़ा नगर को कल्याण चंद ने चंद्र वंश की राजधानी बनाया ,जो चंद्र वंश के पतन तक इनकी राजधानी बना रहा |
अल्मोड़ा.नगर को आबाद करने के लिए कल्याण चंद ने जोशी , मेहरा तथा फर्त्याल आदि जातियों को यहां जागीर प्रदान की तथा उन्हें यहां का निवासी बनाया |

अल्मोड़ा नगर पर चंद वंश का प्रभाव 

चंद्र वंश के राजाओं के समय अल्मोड़ा को राजपुर भी कहा जाता था
मुगलों के प्रभाव में अल्मोड़ा नगर का नाम आलमनगर पड़ा |
कोलमती पर्वत में अल्मोड़ा के उत्तर में चंद राजाओं का शस्त्रागार था।
अल्मोड़ा में राजा रूद्र चंद ने संस्कृत विषय को अध्ययन से जोड़ा और इसी के पुत्र लक्ष्मी चंद ने अल्मोड़ा में महादेव का लक्ष्मेश्वर नाम से मंदिर बनाया ।
एक अन्य चंद राजा बाज बहादुर चंद ने बन्धन गढ़, लोहाबा और जुनेगढ़ आक्रमण कर वहाँ के प्रसिद्द मंदिर से नंदा देवी की मूर्ति लाकर मूर्ति को अल्मोड़ा के पुराने किले में स्थापित किया।
राजा उद्योत चंद ने त्रिपुर सुंदरी, उद्योत चंदेश्वर और परबतेश्वर मंदिरों की स्थापना की राजा ज्ञान चंद को अल्मोड़ा में गणेश मंदिर के पुनर्निर्माण का श्रेय दिया जाता है।

राजाओं की घाटी

अनेक राजाओं की राजधानी होने के कारण अल्मोड़ा को राजाओं की घाटी कहा गया है
पाली पछाऊं जिस का वर्तमान नाम पाली परगना है अल्मोड़ा जनपद में स्थित है इसी पाली पछाऊं क्षेत्र में कत्यूरी शासक असंती देव ने लखनपुर बैराट बसाया था

अंग्रेजी सेना की छावनी

अल्मोड़ा के हवलबाग में अंग्रेजी सेना की छावनी थी ।

1839 के बाद अल्मोड़ा में सेना की छावनी स्थानांतरित किया गया और सैनिकों की तैनाती पिथौरागढ़ और लोहाघाट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में कर दी गई।

1846 में लालमांडी के किले में पुनः इस सैन्य छावनी को स्थानांतरित कर दिया गया, आजादी के बाद रानीखेत छावनी बनने तक सेना यही तैनात रही।

 

Noteवर्तमान में यही सेना कुमाऊं रेजिमेंट के नाम से जानी जाती है।

1804 में श्री रामसे ने अल्मोड़ा के हवलबाग मे कुष्ठ रोगियों लिये सर्वप्रथम इलाज की व्यवस्था की थी।

1837 में अल्मोड़ा के पहाड़ी क्षेत्र में बना पुलिस स्टेशन पहाड़ी का सबसे पुराना पुलिस स्टेशन है।
(अनुमान अनुसार कहा गया है कि 1822-23 में यहां जेल की स्थापना हुई थी। )

1844 में बना मिशन स्कूल अल्मोड़ा में अंग्रेजी शिक्षा शुरू करने वाला पहला स्कूल था।

1871 में इस मिशन स्कूल का नाम बदलकर रामसे कॉलेज हो गया

1864 में अल्मोड़ा नगर में नगर पालिका का गठन हुआ।

पंडित बुद्बिबल्लभ पंत

पंडित बुद्बिबल्लभ पंत जी को अल्मोड़ा में सर्वप्रथम प्रेस खोलने और अख़बार प्रकाशित करने का श्रेय दिया जाता है।

 1871 में बुद्बिबल्लभ पंत जी  ने अल्मोड़ा में एक क्लब खोला जिसे बहस क्लब नाम से जाना जाता था

बाद में श्री बुद्बिबल्लभ पंत जी ने अल्मोड़ा जिले से एक साप्ताहिक पत्रिका अल्मोड़ा अखबार भी प्रकाशित किया।

इसी क्रम में बाबू देवीदस जी ने 1893-94 में ‘कुमाऊं प्रिंटिंग प्रेस’ नाम से एक प्रिंटिंग प्रेस खोली

इस प्रेस से ‘कुर्मांचल समाचार’ नामक साप्ताहिक प्रकाशित किया गया।

 

1901 में एक अस्पताल तथा 1927 में एक महिला अस्पताल अल्मोड़ा में स्थापित किया गया था।

1932 में एसएस बॉय स्काउट एसोसिएशन के निर्मलवन ग्रीष्मकालीन शिविर को शीतलाखेत में खोला गया।

पहली मोटर लॉरी भी 1920 में अल्मोड़ा पहुंची थी।

अल्मोड़ा से ही लोहाघाट, पिथौरागढ़, मुक्तेश्वर और रानीखेत तक टेलीग्राम भेजा जा सकता था

रानीखेत के जरिए अन्य क्षेत्रों के लिए टेलीफ़ोनिक कॉल भी किए जाते थे|


 द्वाराहाट

1. द्वाराहाट अल्मोड़ा जिले का एक पुराना शहर है ,द्वाराहाट का पुराना नाम लखनपुर है जो सुंदर मंदिरों और लुभावनी वादियों से भरा है

2. द्वाराहाट को “मंदिरो की नगरी” भी कहा जाता है |

3. इसके साथ ही द्वाराहाट को “हिमालय की द्वारिका” और “कुमाऊँ का खजुराहो” के नाम से भी जाना जाता है |

4.मध्य काल में कत्यूरी राजाओं के द्वारा यहाँ पर 30 मंदिरों के समूहों का निर्माण करवाया गया था |

इन मंदिरों के समूहों में सबसे उत्कृष्ट मंदिर गूजरदेव का मंदिर है |

5. द्वाराहाट में गढ़वाल शैली में निर्मित प्रसिद्ध बदरीनाथ का मंदिर भी स्थित है|

इसके अलावा द्वाराहाट में लखमपुर मंदिर और महावतार बाबा जी की गुफा भी स्थित है |

6. द्वाराहाट के ऊपर दूनागिरी पर्वत पर दुर्गा देवी का प्राचीन मंदिर है


रानीखेत

1.रानीखेत अल्मोड़ा जनपद में झूलदेवी पर्वत श्रंखलाओं में स्तिथ एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है

2.रानीखेत को पहले ऑकलैंड हिल्स और झूलादेव के नाम से भी जाना जाता था

बाद में कुमाऊं की लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध जियारानी ने रानीखेत में कुछ दिन प्रवास किया जिसकी वजह से यहाँ का नाम रानीखेत पड़ गया

जिया रानी के बचपन का नाम मौला देवी था, ये हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थी )|

-हेनरी रैम्जे को आधुनिक रानीखेत का संस्थापक माना जाता है

– रानीखेत के चौबटिया में फल संरक्षरण एवं शोध केंद्र है ,चौबटिया को ऑर्चिड कंट्री के नाम से जाता है |

वीरणेश्वर (बिनसर)

-बिनसर पहाड़ी के शीर्ष को झंडीधार के नाम से जाना जाता है |

-इसके चारों ओर ओक ,बुरांस ,तथा बांज के घने वन है |

-राजा कल्याणचन्द (1730 -48 ) के द्वारा यहाँ वीरणेश्वर भगवान का मंदिर बनवाया गया था |

-बिनसर में ब्राइट एंड कार्नर ,चीतल मंदिर, डियरपार्क , नंदा देवी मंदिर ,रामकृष्ण मिशन आश्रम ,गोल्ल (गोल्ज्यू ) मंदिर ,गैरा नौला , मिशन स्टेट तथा देवी खाज आदि अनेक प्रसिद्ध स्थान हैं


जागेश्वर

-उत्तराखंड का पांचवा धाम जागेश्वर को जागेश्वर धाम को उत्तराखंड का पांचवा धाम माना जाता है |

-जागेश्वर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है ,यह भगवान शिव की तपस्थली है |

-आठवीं शताब्दी में निर्मित महामृत्युंजय मंदिर यहाँ का सबसे प्राचीन मंदिर है, इसी मंदिर में प्रथम शिवलिंग स्थापित है

-जागेश्वर के मंदिर केदारनाथ शैली से निर्मित है

-केंद्रीय पर्यटन विभाग ने 2005 में जागेश्वर को ग्रामीण पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए चयन किया था |

-श्रावण चतुर्दशी कार्तिक पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा और शिवरात्रि पर जागेश्वर में विशेष पूजा आयोजन होता है |

-आदि गुरु शंकराचार्य ने जागेश्वर में शक्ति पीठ की स्थापना की थी |

-जटा गंगा मंदिर समूह के ऊपर स्थित है, जिससे शिव का अभिषेक किया जाता है|


सोमेश्वर

-अल्मोड़ा जिले की कत्यूर घाटी में सोमेश्वर बसा है

-सोमेश्वर में स्थित महादेव मंदिर प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है ,इस मंदिर का निर्माण चंद्र वंश के संस्थापक राजा सोमचंद ने 700 ईसवी में करवाया था

-सोमेश्वर के महादेव मंदिर में की गई पूजा काशी विश्वनाथ मंदिर में की गई पूजा के समतुल्य मानी जाती है

-यही मंदिर के प्रांगण में एक जलकुंड है इसके विषय में यह मान्यता है कि पूर्व में यह दूध का कुंड था, परंतु कालांतर में अशुद्ध होने के कारण जल कुंड में बदल गया

Almora District | अल्मोड़ा जनपद

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